एक मुदत के बाद मुझे उसका ख्वाब आया,
ख्वाब में उसे अपने साथ सफ़र करते पाया॥
वो मेरे सामने बैठी थी, पर पर्दा नशीं थी ,
नज़र ठहर गई चेहरे पर,जब उसने पर्दा उठाया॥
शायद पहचान ना पाई मुझको,इसीलिए पूछ बैठा ,
पूछा जो नाम ,तो पल भर के लिए चेहरा उतर आया!
सोच रहा था कैसे शुरू करूँ ,क्या उससे मै कहूँ ,
शुक्र है बताने पर ही सही ,उसे कुछ याद तो आया..
उसका चेहरा आज भी मेरी कल्पना जैसा था,
अक्सर रातों को आए किसी सपने जैसा था !
जैसी उम्मीद थी उसे कुछ वैसा ही पाया,
जब साथ बैठे लोगों से मेरा परिचय करवाया ....
गिर ना पड़ें कहीं मेरी आँखों से आंसू ,
मै जल्दी का बहाना करके घर चला आया ....
तिनका तिनका तिहाड़ और जेल की आवाजें- प्रोफेसर (डॉ.) वर्तिका नन्दा
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इस वक्त मैं तिहाड़ जेल में हूं. मेरे सामने है आरती, 35 साल की आरती. उसके
हाथ में एक किताब, किताब का नाम तिनका-तिनका तिहाड़. किताब के पन्नों को पलटते
हुए ...
1 दिन पहले