' अधुरा गीत '
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क्या गाऊं बता मै तेरे लिए ,
एक सपना है तू मेरे लिए ....
सागर से गहरी आँखें है तेरी ,
झुक गई जो नजरें मिलते ही मेरी ....
एक पल तो लगा हकीकत है कोई ,
आसमान से अप्सरा शायद उतरी है कोई ...
क्या गाऊं ......
जुल्फें काली घटा सी घनेरी ,
गालों को चूमती लट ये तेरी ...
गोरा मुखड़ा चाँद का टुकड़ा ,
हटती नहीं जिससे नज़र ये मेरी ...
ये गीत बनाऊं मै तेरे लिए ,
एक सपना है तू मेरे लिए ....
Book Review: Ja se Jail: जेल की मिट्टी असंभव को भी संभव कर सकती है
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*"जेल की मिट्टी में वो ताक़त है कि वह असंभव को भी संभव कर सकती है, इंसान
में 'जज़्बा' होना चाहिए।" रामधनी द्विवेदी *
उपन्यास - ‘ ज से जेल’
लेखिका – वर...
1 हफ़्ते पहले
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