ख्वाबों में देखूं तो बड़ी हसीं लगती है जिंदगी ......
खुली आँखों से बड़ी बेजान सी लगती है ज़िन्दगी ...
महफ़िल में जाऊँ तो रंगीन लगती है ये जिंदगी ....
तन्हाई में सोचूं तो गुमनाम है ये जिंदगी .....
खुशिओं के साए में बड़ी छोटी लगती है जिंदगी .....
गम की परछाई में बहुत लम्बी लगती है जिंदगी ....
यूं तो दोस्तों के बिना भी जीते हैं जिंदगी,
पर "कौशिक "यही है जीना तो क्या है जिंदगी...
तिनका तिनका तिहाड़ और जेल की आवाजें- प्रोफेसर (डॉ.) वर्तिका नन्दा
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इस वक्त मैं तिहाड़ जेल में हूं. मेरे सामने है आरती, 35 साल की आरती. उसके
हाथ में एक किताब, किताब का नाम तिनका-तिनका तिहाड़. किताब के पन्नों को पलटते
हुए ...
1 दिन पहले
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