बिन देखे क्या कहे ,
बिन जाने क्या लिखे ...
कुछ तुम कहो ,
कुछ हम कहे ,
आओ एक दूजे को जान ले ...
जिन्दगी की इस दोड़ में ,
आगे बढने की होड़ में ,
कुछ अपने पीछे छुट गए,
कुछ रिश्ते भी टूट गए ...
मिलना अपना मुमकिन नहीं,
फिर भी अगर मिल जाए कहीं ...
शब्दों की बिना पर,
एक दूजे को पहचान ले ....
कुछ तुम कहो,
कुछ हम कहे,
आओ एक दूजे को जान ले ......
Jail की दीवारों के पीछे का सच, औरतों और बच्चों की कहानी | ‘ज से जेल’ |
Sahitya Tak | 3 November, 2026
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3 November, 2026: I am deeply pleased and humbled to see such an insightful
and elaborate review of my recent novel, J Se Jail, by the distinguished
lite...
1 दिन पहले
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